श्याम बाबा की तस्वीर
अंतिम अपडेट: 18 अक्टूबर 2026
श्याम जी की हर तस्वीर में कुछ प्रतीक होते हैं। यहाँ उनका अर्थ और घर में तस्वीर रखने के परंपरागत सुझाव हैं।
प्रतीकों का अर्थ
| प्रतीक | भाव |
|---|---|
| शीश | बर्बरीक का शीश-दान; "शीश के दानी" |
| मुकुट और श्रृंगार | खाटू नरेश का राजसी रूप |
| मोरपंख | श्रीकृष्ण से जुड़ाव |
| तीन बाण | "तीन बाणधारी" |
| नीला घोड़ा | लीले के असवार का प्रतीक |
| केसरिया निशान | भक्ति और विजय का ध्वज |
घर में कहाँ लगाएँ
- पूजा-स्थान ईशान (उत्तर-पूर्व) में, मुख पूर्व या उत्तर की ओर शुभ माना जाता है।
- चित्र आँखों की ऊँचाई या उससे ऊपर, शेल्फ़ पर — ज़मीन पर नहीं।
- शयनकक्ष, सीढ़ी के नीचे, शौचालय की साझा दीवार और रसोई से बचें।
- मुख्य चित्र एक ही रखें; फीके या फटे चित्र को आदर के साथ विसर्जित करें।
- दुकान में गल्ले के पास दीपक के साथ रखने की परंपरा है।
ये परंपरागत सुझाव हैं, कठोर शास्त्रीय नियम नहीं; अपने परिवार की रीति को प्राथमिकता दें।
उपयोग का ध्यान
जो तस्वीरें आप ऑनलाइन देखें, वे भक्ति-डिज़ाइन होती हैं, आज के श्रृंगार की तस्वीर नहीं। आज का वास्तविक श्रृंगार मंदिर समिति की आधिकारिक सामग्री पर देखें। किसी की बनाई तस्वीर को अपने नाम से बेचना या व्यावसायिक उपयोग उचित नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ध्यान दें: यह साइट श्री श्याम मंदिर समिति की आधिकारिक वेबसाइट नहीं है। समय, किराया और नियम बदलते रहते हैं — यात्रा से पहले श्री श्याम मंदिर समिति की आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय सूचना से पुष्टि कर लें।