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श्याम बाबा के प्रचलित नाम

अंतिम अपडेट: 18 अक्टूबर 2026

भक्त श्याम बाबा को अनेक नामों से पुकारते हैं। हर नाम के पीछे उनकी कथा का कोई प्रसंग या भक्तों का अनुभव है। यहाँ सबसे प्रचलित नाम और उनका भाव सरल शब्दों में है।

नामभाव / किससे जुड़ा
शीश के दानीकथा के अनुसार बर्बरीक ने श्रीकृष्ण को अपना शीश दान कर दिया।
हारे का सहाराबर्बरीक का वचन था कि वे हमेशा हारने वाले पक्ष के साथ रहेंगे; भक्त निराश घड़ी में यही नाम पुकारते हैं।
तीन बाण धारीदेवी से मिले तीन अचूक बाणों के कारण।
नीले घोड़े का असवारलोक-कथाओं में बर्बरीक नीले घोड़े पर सवार माने गए हैं।
मोरवीनंदनमाता मौर्वी/मोरवी के पुत्र होने से (परम्परा में माता का नाम अहिलावती भी बताया जाता है)।
घटोत्कच के पुत्रपिता घटोत्कच, दादा भीमसेन — इसलिए पांडव-वंश से सम्बन्ध।
खाटू नरेश / खाटू वाले श्यामखाटू (राजस्थान) में शीश-रूप में पूजे जाने से।
लखदातार"लाखों को देने वाले" — भक्तों की श्रद्धा का भाव।
श्याम धणीराजस्थानी में "धणी" यानी स्वामी; "श्याम के स्वामी"।
कलियुग के अवतार / कलियुग के देवश्रीकृष्ण के वरदान की मान्यता — कलियुग में "श्याम" नाम से पूजे जाएँगे।

"108 नाम" की सूची क्यों नहीं?

इंटरनेट पर कई जगह "श्याम बाबा के 108 नाम" की सूचियाँ मिलती हैं, पर कोई एक मान्य शास्त्रीय सूची हमें नहीं मिली और कई जगह नाम दोहराए/गढ़े हुए लगते हैं। इसलिए हम सिर्फ़ वही नाम देते हैं जो भक्तों और भजनों में सचमुच प्रचलित हैं।

यह जानकारी लोक-परम्परा, भक्तों के अनुभव और आम मान्यताओं पर आधारित है; अलग मंदिरों/परिवारों में तरीक़े अलग हो सकते हैं। मंदिर के नियम और समय के लिए दर्शन व आरती समय या मंदिर कमेटी की घोषणा ही मानें।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ध्यान दें: यह साइट श्री श्याम मंदिर समिति की आधिकारिक वेबसाइट नहीं है। समय, किराया और नियम बदलते रहते हैं — यात्रा से पहले श्री श्याम मंदिर समिति की आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय सूचना से पुष्टि कर लें।