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श्याम चालीसा: पाठ और विधि

अंतिम अपडेट: 18 अक्टूबर 2026

चालीसा श्याम जी की स्तुति का लोकप्रिय पाठ है — एक दोहा, चालीस के आसपास चौपाइयाँ और समापन दोहा। नीचे पूरा पाठ और फिर पाठ करने का तरीक़ा है।

श्याम चालीसा — पाठ

श्री श्याम चालीसा
॥ दोहा ॥
श्री गुरु चरण ध्यान धर, सुमिरि सच्चिदानन्द।
श्याम चालीसा भणत हूँ, रच चौपाई छन्द॥
॥ चौपाई ॥
श्याम श्याम भजि बारम्बारा, सहज ही हो भवसागर पारा।
इन सम देव न दूजा कोई, दीन दयालु न दाता होई।
भीमसुपुत्र अहिलवती जाया, कहीं भीम का पौत्र कहाया।
यह सब कथा सही कल्पान्तर, तनिक न मानों इसमें अन्तर।
बर्बरीक विष्णु अवतारा, भक्तन हेतु मनुज तनु धारा।
वसुदेव देवकी प्यारे, यशुमति मैया नन्द दुलारे।
मधुसूदन गोपाल मुरारी, बृजकिशोर गोवर्धन धारी।
सियाराम श्री हरि गोविन्दा, दीनपाल श्री बाल मुकन्दा।
दामोदर रणछोड़ बिहारी, नाथ द्वारिकाधीश खरारी।
नरहरि रूप प्रहलाद प्यारा, खम्भ फारि हिरनाकुश मारा।
राधा वल्लभ रुक्मिणी कंता, गोपी वल्लभ कंस हनंता।
मनमोहन चित्तचोर कहाये, माखन चोरी चोरि कर खाये।
मुरलीधर यदुपति घनश्याम, कृष्ण पतितपावन अभिराम।
मायापति लक्ष्मीपति ईसा, पुरुषोतम केशव जगदीशा।
विश्वपति त्रिभुवन उजियारा, दीन बन्धु भक्तन रखवारा।
प्रभु का भेद कोई न पाया, शेष महेश थके मुनिराया।
नारद शारद ऋषि योगिन्द्रा, श्याम श्याम सब रटत निरन्तर।
कवि कोविद करि सके न गिनन्ता, नाम अपार अथाह अनन्ता।
हर सृष्टि हर युग में भाई, ले अवतार भक्त सुखदाई।
हृदय माँहि करि देखु विचारा, श्याम भजे तो हो निस्तारा।
कीर पढ़ावत गणिका तारी, भीलनी की भक्ति बलिहारी।
सती अहिल्या गौतम नारी, भई श्राप वश शिला दुखारी।
श्याम चरण रच नित लाई, पहुँची पतिलोक में जाई।
अजामिल अरु सदन कसाई, नाम प्रताप परम गति पाई।
जाके श्याम नाम अधारा, सुख लहहि दुःख दूर हो सारा।
श्याम सुलोचन है अति सुन्दर, मोर मुकुट सिर तन पीताम्बर।
गल वैजयन्तिमाल सुहाई, छवि अनूप भक्तन मन भाई।
श्याम सुमिरत दिनरात, श्याम दुपहरि अरु परभाती।
श्याम सारथी जिसके रथ के, रोड़े दूर होय उस पथ के।
श्याम भक्त न कहीं पर हारा, भीर परि तब श्याम पुकारा।
रसना श्याम नाम रस पी ले, जी ले श्याम नाम के हाले।
संसारी सुख भोग मिलेगा, अन्त श्याम सुख योग मिलेगा।
श्याम प्रभु हैं तन के काले, मन के गोरे भोले भाले।
श्याम संत भक्तन हितकारी, रोग दोष अघ नाशै भारी।
प्रेम सहित जे नाम पुकारा, भक्त लगत श्याम को प्यारा।
खाटू में मथुरा वासी, पार बह्म पूरण अविनासी।
सुधा तान भरि मुरली बजाई, चहुँ दिशि नाना जहाँ सुनि पाई।
वृद्ध बाल जेते नारी नर, मुग्ध भये सुनि वंशी के स्वर।
दौड़ दौड़ पहुँचे सब जाई, खाटू में जहाँ श्याम कहाई।
जिसने श्याम स्वरूप निहारा, भव भय से पाया छुटकारा।
॥ दोहा ॥
श्याम सलोने साँवरे, बर्बरीक तनु धार।
इच्छा पूर्ण भक्त की, करो न लाओ बार॥

यह पाठ पाठक द्वारा भेजी गई एक छपी चालीसा की तस्वीर से लिखा गया है। अलग-अलग पुस्तिकाओं में कहीं-कहीं शब्द भिन्न मिलते हैं — पाठ से पहले अपनी छपी पुस्तिका से एक बार मिलान कर लें।

कब पढ़ें

ब्रह्म मुहूर्त (भोर 4–6) या शाम को दीपक जलाने के बाद। स्नान के बाद सर्वश्रेष्ठ; न हो सके तो हाथ-मुँह धोकर भी पढ़ा जा सकता है। पूरा पाठ 10–15 मिनट का है।

कैसे पढ़ें

  1. साफ़ आसन (कपड़ा या कुश) बिछाकर पूर्व या उत्तर की ओर बैठें।
  2. श्याम जी के चित्र के सामने दीपक जलाएँ, धूप-फूल अर्पित करें।
  3. पहले आरती करें, फिर शांत मन से चालीसा पढ़ें; बीच में उठें नहीं, फ़ोन दूर रखें।
  4. पाठ के बाद श्याम नाम या मंत्र की एक माला करें और प्रसाद चढ़ाएँ।

40 दिन का संकल्प

कई भक्त किसी मनोकामना या अनुशासन के लिए रोज़ एक ही समय पर 40 दिन तक पाठ का संकल्प लेते हैं। एकादशी से शुरू करना शुभ माना जाता है (बाध्यता नहीं)। कोई दिन छूटे तो परंपरा में पहले दिन से दोबारा शुरू करने की बात कही जाती है। 11 या 21 दिन के संकल्प भी लिए जाते हैं। यह आस्था का अभ्यास है — परिणाम की गारंटी नहीं।

यात्रा या बीमारी में

मन ही मन पाठ करना भी स्वीकार्य माना गया है। मोबाइल/PDF से पढ़ें तो नोटिफ़िकेशन बंद रखें।

क्या महिलाएँ पढ़ सकती हैं?

इस पर कोई एक कठोर नियम नहीं; भाव को प्रधान माना जाता है। मासिक धर्म के दिनों में कई परिवार मन-ही-मन नाम-स्मरण करते हैं और पूजा-स्थान से दूर रहते हैं, कुछ परिवार अलग परंपरा मानते हैं। अपने परिवार की परंपरा और अंतरात्मा को आधार बनाएँ।

लाभ (भक्तों की मान्यता)

ये व्यक्तिगत आस्था के अनुभव हैं, वैज्ञानिक दावे या चिकित्सा का विकल्प नहीं।

music_noteआरती व श्याम स्तुतिपाठ से पहलेself_improvementश्याम मंत्रजप की विधिtemple_hinduपूजा विधिरोज़ की पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ध्यान दें: यह साइट श्री श्याम मंदिर समिति की आधिकारिक वेबसाइट नहीं है। समय, किराया और नियम बदलते रहते हैं — यात्रा से पहले श्री श्याम मंदिर समिति की आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय सूचना से पुष्टि कर लें।