खाटू श्याम जी की आरती और श्याम स्तुति — पाठ, वीडियो, समय व विधि
अंतिम अपडेट: 4 अक्टूबर 2026
खाटू श्याम जी की आरती भक्तों में सबसे ज़्यादा गाई जाने वाली आरतियों में है। नीचे परम्परा में प्रचलित पाठ, आरती का समय और घर पर करने की सरल विधि दी गई है।
ॐ जय श्री श्याम हरे — आरती का पाठ
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥
रत्न जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे।
तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े॥ ॐ जय…॥
गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट धरे।
खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले॥ ॐ जय…॥
मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे।
सेवक भोग लगावत, सेवा नित करे॥ ॐ जय…॥
झांझ कटोरा और घडियावल, शंख मृदंग घुरे।
भक्त आरती गावे, जय जयकार करे॥ ॐ जय…॥
जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे।
सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम श्याम उचरे॥ ॐ जय…॥
श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत भक्त जन मनवांछित फल, निश्चय वह पावे॥ ॐ जय…॥
यह परम्परागत आरती है; अलग-अलग क्षेत्रों और पुस्तिकाओं में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है।
आरती सुनें
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श्री श्याम स्तुति
आरती के साथ भक्त अक्सर यह श्याम स्तुति भी पढ़ते या सुनते हैं — दोहों में बाबा श्याम से विनती, खाटू धाम की महिमा और फाल्गुन मेले का स्मरण है।
सुनें — श्याम स्तुति
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॥ ॐ श्री श्याम देवाय नमः ॥
हाथ जोड़ विनती करू, सुनियो चित्त लगाय ।
दास आ गयो शरण में रखियो इसकी लाज ।।
धन्य ढूंढा रो देश है, खाटू नगर सुजान ।
अनुपम छवि श्री श्याम की दर्शन से कल्याण ।।
श्याम श्याम तो मैं रटूँ श्याम है जीवन प्राण ।
श्याम भक्त जग में बड़े उनको करूँ प्रणाम ।।
खाटू नगर के बीच में बण्यो आपको धाम ।
फाल्गुन शुक्ल मेला भरे जय जय बाबा श्याम ।।
फाल्गुन शुक्ल द्वादशी उत्सव भारी होए ।
बाबा के दरबार से खाली जाए न कोए ।।
उमा पती लक्ष्मी पती सीता पति श्री राम ।
लज्जा सबकी राखियो खाटू के श्री श्याम ।।
पान सुपारी इलायची अतर सुगंध भरपूर ।
सब भक्तों की वीनती दर्शन देवो हजूर ।।
आलू सिंह तो प्रेम से धरे श्याम को ध्यान ।
श्याम भक्त पावे सदा श्याम कृपा से मान ।।
जय श्री श्याम बोलो जय श्री श्याम ।
खाटू वाले बाबा जय श्री श्याम ।।
लीलो घोड़ो लाल लगाम ।
जिस पर बैठ्यो बाबो श्याम ।।
स्तुति का पाठ भक्तों में प्रचलित रूप में दिया गया है; अलग-अलग गायकों/पुस्तिकाओं में शब्दों में थोड़ा अंतर हो सकता है।
आरती का भावार्थ — सरल शब्दों में
- खाटू धाम विराजत: बाबा श्याम खाटू धाम में अपने अनुपम स्वरूप में विराजमान हैं।
- रत्न जड़ित सिंहासन, चंवर, मुकुट: राजसी सजावट का वर्णन — इसीलिए उन्हें "खाटू नरेश" भी कहा जाता है।
- तन केसरिया बागो: केसरिया वस्त्र का उल्लेख; श्रृंगार में पीले-केसरिया रंग का विशेष स्थान है।
- मोदक, खीर, चूरमा: भोग में चढ़ाई जाने वाली मिठाइयाँ।
- झांझ, मृदंग, शंख: आरती के समय बजने वाले वाद्य, जो वातावरण को उत्सवमय बनाते हैं।
- जो ध्यावे फल पावे: श्रद्धा से स्मरण करने वाले को मन की शांति और सहारा मिलने की भावना।
मंदिर में आरती का समय
मंदिर में दिन में पाँच आरतियाँ होती हैं — मंगला, श्रृंगार, भोग, संध्या और शयन। समय ऋतु और उत्सव के अनुसार बदलता है।
स्रोत: श्री श्याम मंदिर कमेटी, खाटू की आधिकारिक समय-सारणी के अनुसार (4 अक्टूबर 2026 को जाँची गई)। उत्सव, मेला, ग्रहण या एकादशी पर समय बदल सकता है — मंदिर हेल्पलाइन 01576-231482 या आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि करें। होम पेज पर "अगली आरती" की गिनती भी दिखती है।
घर पर आरती कैसे करें
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और घर के पूजा-स्थान पर बाबा श्याम का चित्र या मूर्ति रखें।
- घी का दीपक और धूप/अगरबत्ती जलाएँ; ताज़े फूल अर्पित करें।
- भोग में मिश्री, खीर, चूरमा या कोई भी साफ़-सुथरा प्रसाद रखें।
- थाली में दीपक लेकर चित्र के सामने घड़ी की दिशा में घुमाते हुए श्रद्धा से आरती गाएँ।
- अंत में "जय श्री श्याम" बोलकर प्रणाम करें और प्रसाद सबको बाँटें।
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