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खाटू श्याम निशान यात्रा — रूट, नियम और तैयारी

अंतिम अपडेट: 4 अक्टूबर 2026

निशान यात्रा खाटू श्याम जी की सबसे प्रसिद्ध पदयात्रा है, जिसमें भक्त केसरिया/पीला ध्वज (निशान) लेकर पैदल या जयकारे के साथ बाबा के दरबार पहुँचते हैं।

निशान क्या होता है?

निशान बाबा श्याम का ध्वज है — श्रद्धा, विजय और समर्पण का प्रतीक। भक्त इसे सजाकर हाथ में उठाए, "जय श्री श्याम" के नारे लगाते हुए यात्रा करते हैं और मंदिर में अर्पित करते हैं।

प्रसिद्ध रूट

शुरुआतदूरी (लगभग)समय (अनुमान)
रींगस से खाटू17 कि.मी.4–5 घंटे — सबसे लोकप्रिय, क्योंकि रींगस सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन है
सूरजगढ़ (झुंझुनूं) से खाटू152 कि.मी.कई दिन — सूरजगढ़ का सफ़ेद निशान मेले में प्रमुख माना जाता है
जयपुर से खाटू80 कि.मी.2–3 दिन
दिल्ली से खाटू270–285 कि.मी.लगभग 10–12 दिन

दूरी/समय अनुमानित हैं। सूरजगढ़ की निशान यात्रा की परम्परा सदियों पुरानी बताई जाती है।

कब होती है यात्रा?

सबसे बड़ी यात्रा फाल्गुन मेले (फाल्गुन शुक्ल एकादशी–द्वादशी) में होती है; हर एकादशी से कुछ दिन पहले भी छोटी टोलियाँ निकलती हैं। पूरी तारीख़ें पंचांग कैलेंडर में देखें।

पदयात्रा के नियम और सुझाव

यात्रा-मार्ग और साधन: कैसे पहुँचें · रुकने और सुझाव: यात्रा गाइड।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल